कांग्रेस का इल्जामः बीजेपी का समर्थन नहीं करने के कारण बीसीसीआई के कांट्रेक्ट से बाहर हुए धोनी

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पैगाम ब्यूरोः बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपने सालाना कांट्रेक्ट से बाहर कर दिया है. हाल ही में बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के साथ हर साल होने वाले कांट्रेक्ट की लिस्ट जारी की, जिसमें धोनी का नाम नहीं है. बीसीसीआई के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने यह इल्जाम लगाया था कि बीजेपी का समर्थन करने के लिए राजी नहीं होने की वजह से ही महेंद्र सिंह धोनी को बीसीसीआई के कांट्रेक्ट से बाहर किया गया है. अब कांग्रेस ने भी यह सनसनीखेज इल्जाम लगाया है. कांग्रेस ने सवाल किया है कि क्या सच में धोनी को बाहर किये जाने के पीछे बीजेपी का हाथ है? अगर यह सच है तो इससे शर्मनाक बात कुछ और नहीं हो सकती है.
बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले महेंद्र सिंह धोनी के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के कुछ नेताओं ने धोनी के साथ संपर्क कर उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन टीम इंडिया के पूर्व कप्तान इसके लिए राजी नहीं हुए. इस पर बीजेपी की तरफ से उन्हें यह प्रस्ताव दिया गया था कि भले ही वो बीजेपी में शामिल न हों, लेकिन पार्टी के लिए झारखंड विधानसभा चुनाव में प्रचार करें, लेकिन धोनी इस पर भी राजी नहीं हुए.
कांग्रेस ने इल्जाम लगाया है कि धोनी के इस फैसले से नाराज हो कर ही बीजेपी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के ऊपर दबाव डाल कर उन्हें बोर्ड के सेंट्रल कांट्रेक्ट से बाहर करवा दिया.
कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि क्या यह सही है कि देश के लिये विश्व कप जीतने के साथ साथ अनेको उपलब्धियाँ हासिल करने वाले महेन्द्र सिंह धोनी का अनुबंध भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने केवल इस लिये रद्द कर दिया कि उन्होंने झारखंड चुनाव के समय भाजपा मे शामिल होने या प्रचार करने से इनकार कर दिया था? हाँ, तो शर्मनाक।
बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में बीसीसीआई की नयी कमेटी वजूद में आयी थी. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को बोर्ड का अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को सचिव की कुर्सी मिली. इस नियुक्ति पर सवाल उठे थे. कांग्रेस ने इल्जाम लगाया था कि भारत में क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था पर पिछले दरवाजे से बीजेपी ने कब्जा कर लिया है. सौरव गांगुली पर बीजेपी की मदद से अध्यक्ष बनने का इल्जाम लगा. वहीं अमित शाह के बेटे जय शाह की नियुक्ति पर भी खूब सवाल किये गये थे.

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