ममता का इल्जामःसिर्फ गैर-बीजेपी शासित राज्यों में नागरिकता कानून को आगे बढ़ा रही है मोदी सरकार

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पैगाम ब्यूरोः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने इल्जाम लगाया है कि मोदी सरकार गैर-बीजेपी शासित में नागरिकता कानून को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
ममता बनर्जी ने बुधवार को देश के चंद बेहतरीन पर्यटनस्थलों में से एक दार्जिलिंग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ एक विशाल रैली निकाली. भानुभक्ता भवन से चौक बाजार तक पांच किलोमीटर लंबी इस रैली में हजारों की तादाद महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए थे. रैली में शामिल सभी लोग अपने हाथों में तिरंगा लिए हुए थे.
इस मौके पर ममता बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार के डर से पश्चिम बंगाल को छोड़ कर देश के सभी राज्य नयी दिल्ली में हुई एनपीआर (NPR) की बैठक में शामिल हुए थे. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि अमित शाह को साफ करना चाहिए कि क्या किसी व्यक्ति को पहले विदेशी घोषित किया जायेगा और फिर उसके बाद उसे नागरिकता कानून (CAA) के तहत भारत की नागरिकता के लिए आवेदन की अनुमति होगी.
नागरिकता कानून विरोधी इस रैली में लोगों ने पारंपरिक रंग-बिरंगे कपड़े पहने हुए थे. उन्होंने हाथों में अलग-अलग पोस्टर और बैनर भी लिया था. घुमावदार ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों पर निकली रैली में नो एनआरसी, नो सीएए, नो एनपीआर के नारे लगाये गये. रैली जिस-जिस रास्ते से होकर गुजरी, उसके दोनों तरफ बड़ी तादाद में लोग खड़े हुए थे.
इस रैली में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (विनय तमांग गुट) के समर्थक भी शामिल हुए थे. कई और स्थानीय दलों ने भी इस रैली को अपना समर्थन दिया था.
बता दें कि ममता बनर्जी नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर का लगातार विरोध कर रही हैं. उन्होंने साफ कह दिया है कि पश्चिम बंगाल में नागरिकता कानून और एनआरसी लागू नहीं होगा. वो या राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि एनपीआर की बैठक में भी शामिल नहीं हुआ था. अब 27 जनवरी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नागरिकता कानून के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास किया जायेगा.

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