योगी सरकार की बदले की कार्रवाईः रिहाई से पहले डॉ कफील खान पर लगाया एनएसए

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पैगाम ब्यूरोः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को हर उस व्यक्ति से चिढ़ है, जो उसकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है. और अगर आवाज बुलंद करने वाला मुसलमान हो, तो फिर योगी सरकार की चिढ़ नफरत में बदल जाती है. जिसका नजारा कई बार देखने को मिला है. योगी सरकार पिछले काफी दिनों से गोरखपुर के उस डॉ. कफील खान के पीछे पड़ी हुई है, जिसने योगी के गढ़ गोरखपुर के अस्पताल में दम तोड़ने वाले बच्चों की जान बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. इस घटना से योगी सरकार की जो जग-हंसाई हुई, उसका बदला उसने डॉ. कफील खान पर ढेरों मुकदमे दायर कर लिया है. कुछ दिन पहले उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ बयान देने के आरोप गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है. अभी वो जेल से निकले भी नहीं हैं कि अब योगी सरकार ने उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने डॉ. कफील खान के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की है.
बता दें कि शुक्रवार को डॉ. कफील खान जमानत पर रिहा होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही योगी सरकार ने उनके खिलाफ एनएसए लगा दिया. जिसके फलस्वरुप उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं
डॉक्टर कफील खान पर 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. इस आरोप में यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील को जनवरी में मुंबई से गिरफ्तार किया था. डॉ. कफील खान को गिरफ्तार करने के लिए यूपी एसटीएफ लगाने पर सवाल भी उठे थे.
पुलिस दावा कर रही है कि भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ. कफील को गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था. यूपी एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉ. कफील खान ने कहा था कि मुझे गोरखपुर के बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी. अब मुझको फिर से आरोपी बनाने की कोशिश की जा कर रही हैं. मैं महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि मुझे महाराष्ट्र में रहने दे. मुझे यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है.
डॉ. कफील खान फिलहाल मथुरा की जेल में बंद हैं. इस मामले में 10 फरवरी को सीजेएम कोर्ट ने डॉ. कफील खान को जमानत दे दी थी. कोर्ट ने 60,000 रुपये के दो बांड के साथ सशर्त जमानत दी थी. लेकिन जमानत मिलने के 4 दिन बाद भी उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया. जिसपर यह आरोप लगने लगा था कि योगी सरकार अदालत से भी बड़ी हो गयी है. अब जेल से रिहाई वाले दिन उनके खिलाफ एनएसए लगा देने से यह साफ हो गया है कि योगी सरकार उनसे बदला ले रही है.
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) सरकार को किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखने की ताकत देता है. एनएसए लगाकर किसी भी व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है.

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