ममता का इल्जामः केंद्र की बदले की राजनीति के कारण हुई पूर्व सांसद तापस पाल की मौत

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पैगाम ब्यूरोः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व सांसद और बंगाली फिल्मों के मशहूर एक्टर तापस पाल की असामयिक मौत के लिए केंद्र सरकार और सीबीआई को जिम्मेदार ठहराया है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की बदले की राजनीति और सीबीआई के दबाव के कारण तापस पाल की मौत हुई है.

तापस पाल की मौत के एक दिन बाद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार के दबाव ने कई लोगों की जान ले ली है. केंद्रीय एजेंसियों के इस दबाव के कारण तीन लोगों की जान चली गयी. पहले टीएमसी सांसद सुल्तान अहमद, फिर टीएमसी सांसद प्रसून बनर्जी की पत्नी और अब तापस पाल की मौत हो गयी.

ममता बनर्जी ने कहा कि लोगों को जेल में डाला जा रहा है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियां ​​उनके खिलाफ न तो कुछ साबित कर पा रही हैं और न ही यह बता पा रही हैं कि उन्होंने क्या अपराध किया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराध करता है, तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना ही होगा, लेकिन हमें अभी भी यह नहीं पता है कि तापस पाल और दूसरे लोगों ने क्या अपराध किया है. टीएमसी प्रमुख ने कहा कि इन सभी मौतों के लिए केंद्र सरकार और उसकी प्रतिशोध की राजनीति जिम्मेदार है.

बता दें कि तापस पाल का मंगलवार तड़के मुंबई के एक अस्पताल में हृदयगति रुकने से निधन हो गया था. वह 61 साल के थे.

तपस पाल की आकस्मिक मौत के बाद तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो गया है. जहां टीएमसी केंद्र सरकार को तापस पाल को “मानसिक रूप से प्रताड़ित” करने और “राजनीतिक प्रतिशोध” लेने का इल्जाम लगा रही है. वहीं बीजेपी ने इस आरोप को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है. बीजेपी का कहना है कि तापस पाल ने अपनी पार्टी के “पापों” का भुगतान किया है, जिसने उन्हें बलि का बकरा बना दिया.

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा के दो बार के पूर्व सांसद तापस पाल काफी दिनों से बीमार चल रहे थे. पिछले दो वर्षों के दौरान उन्हें स्वास्थ्य कारणों से बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा था. आखिरकार मंगलवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

तापस पाल को दिसंबर 2016 में रोज वैली चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. जेल जाने के बाद तापस पाल सिनेमा और सक्रिय राजनीति दोनों से दूर चले गये थे. 13 महीनों के बाद 2018 में जेल से रिहा होने पर तापस पाल ने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया था. उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भी बता दिया था कि अब वो चुनावी राजनीति का हिस्सा बनना नहीं चाहते हैं.

बता दें कि तापस पाल का जन्म 28 सितंबर, 1958 को हुआ था. उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत 1980 में बंगाली फिल्म ‘दादार कीर्ति’ से की थी. 80 के दशक में वो अपनी लोकप्रियता की चरमसीमा पर थे. इस दौरान उन्होंने लगातार कई हिट फिल्में दीं. 1981 में उन्हें फिल्म ‘साहेब’ के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था.
तापस पाल ने 1984 में फिल्म ‘अबोध’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. इस फिल्म में उनकी हीरोईन माधुरी दीक्षित थीं. माधुरी की भी यह पहली फिल्म थी.

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