दिल्ली पुलिस के संरक्षण में कामयाब हो गया कपिल मिश्रा का मिशन, जलने लगी दिल्ली

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पैगाम ब्यूरोः एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के ‘100 करोड़ पर 15 करोड़ भारी’ वाले बयान पर पूरी दुनिया में बवाल मच गया. कई केस उन पर लाद दिये गये. चारों तरफ से वारिस पठान की गिरफ्तारी मांग हो रही है. पठान को गिरफ्तार करने की मांग करने वालों में सिर्फ बीजेपी और भगवा संगठन ही नहीं, विपक्ष के नेता भी शामिल हैं. लेकिन दिल्ली में बीजेपी का नेता कपिल मिश्रा पुलिस के सामने दंगा करने की खुलेआम धमकी देता है. अपने गुंडों के साथ पत्थर लेकर पहुंचता है और फिर दंगे शुरू हो जाते हैं, लेकिन न तो उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हुआ है और न ही किसी पार्टी के जरिये उसे गिरफ्तार करने की मांग की जा रही है.

सीएए के खिलाफ दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर महिलाएं शनिवार से प्रदर्शन कर रही हैं. इस प्रदर्शन के खिलाफ बीजपी नेता कपिल मिश्रा रविवार को मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास अपने साथियों के साथ पहुंच गया और लोगों को भड़का कर पत्थरबाजी शुरू करवा दी. पुलिस की मौजूदगी में लोगों को पकड़-पकड़ कर मारा गया और पुलिस न सिर्फ देखती रही, बल्कि दंगाईयों को सुरक्षा देती रही.

सोमवार को फिर वही घटना दोहरायी गयी. कपिल मिश्रा के समर्थक दोबारा दोबारा वहां पहुंचे. उसके बाद मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास फिर से पत्थरबाजी हुई. पुलिस ने कपिल मिश्रा के दंगाई समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नागरिकता कानून का विरोध करने वालों पर लाठियां बरसायीं. उन पर आंसू गैस के गोले दागे गये.

अगर यह कहा जाये तो गलत न होगा कि पुलिस की देखरेख में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पूरे दिल्ली में आग लगाने की कोशिश कर रहा है और उसकी कोशिश कामयाब होती भी नजर आ रही है. दिल्ली पुलिस और दिल्ली की सरकार दोनों खामोश तमाशा देख रहे हैं.

इस घटना में सबसे भयानक रवैया अरविंद केजरीवल और उनकी सरकार का नजर आ रहा है. माना कि पुलिस दिल्ली सरकार के हाथों में नहीं है, लेकिन केजरीवाल सरकार कपिल मिश्रा की इस हरकत के खिलाफ आवाज तो बुलंद कर सकती है, लेकिन आम आदमी पार्टी का कोई विधायक व नेता जाफरादबाद में महिलाओं पर हुई लाठी चार्ज की घटना और कपिल मिश्रा और उसके साथियों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश पर पूरी तरह खामोश है. केजरीवाल इतनी जल्दी यह भूल गये कि दिल्ली की जनता ने सांप्रदायिक राजनीति को नकार कर फिर से उन्हें दिल्ली का तख्त सौंपा है.

बीजेपी सरकार मुसलमानों पर छोटी-छोटी बात के लिए देशद्रोह का मामला दर्ज कर देती है, लेकिन कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किये जाने का साफ मतलब है कि उसे केंद्र सरकार का समर्थन हासिल है, क्योंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है. कपिल मिश्रा न तो पार्षद है और न ही विधायक और सांसद है, बल्कि वो सिर्फ बीजेपी का एक आम कार्यकर्ता है, लेकिन उसकी हिम्मत देखिये कि वो सरेआम दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के सामने पुलिस को धमकी दे रहा है. उसकी यह दिलेरी यह बता रही है कि उसके पीछे बड़े लोगों का हाथ है.

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