अब मस्जिदों में भी लग जायेंगे ताले

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पैगाम ब्यूरोः कहते हैं कि जब बुरा वक्त आता है तो इंसान ऊपर वाले को याद करने लगता है, लेकिन कोरोना वायरस एक ऐसी महामारी है, जिसमें लोग भगवान, खुदा, गॉड सभी से दूर होने लगे हैं. इस जानलेवा रोग के चलते पहले ही देश की कई मंदिरों को बंद किया जा चुका है, अब मस्जिदों की बारी है.

कोरोना वायरस से बचने के लिए डॉक्टर लोगों को किसी से मिलने-जुलने से मना कर रहे हैं. डॉक्टरों और इस बीमारी का मुकाबला कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान, जब तक दूसरे इंसान से दूर रहेगा, तब तक यह बीमारी भी उससे दूर रहेगी. इसलिए लोग अपने-अपने धार्मिक स्थलों से दूर हो रहे हैं, क्योंकि वहां लोगों की भीड़ जुटती है.

इसी के मद्देनजर अब मस्जिदों के दरवाजे भी बंद किये जाने का फैसला लिया गया है. पश्चिम बंगाल की मस्जिदों के इमाम के संगठन बंगाल इमाम एसोसिएशन ने आमलोगों के लिए मस्जिदों के दरवाजे बंद किये जाने का एलान किया है.

बंगाल इमाम एसोसिएशन ने राज्य की तमाम मस्जिदों के इमाम, मस्जिद कमेटियों के सेक्रेटरी और मुतवल्लियों से मस्जिद बंद करने का अनुरोध किया है. एक बयान में संगठन ने कहा है कि बुधवार से सभी मस्जिदों के दरवाजे आमलोगों के लिए बंद कर दिये जायें. इसके लिए सभी मस्जिद कमेटियों के पास तय वक्त पर नोटिस पहुंच जायेगा.

हालांकि मस्जिद के दरवाजे बंद करने का मतलब यह नहीं है कि मस्जिद में नमाज नहीं होगी. बंगाल इमाम एसोसिएशन ने कहा कि तय वक्त पर सभी मस्जिदों में अजान होगी. इमाम साबेह चार-पांच लोगों को लेकर जमात के साथ नमाज पढ़ायेंगे.

बंगाल इमाम एसोसिएशन ने नमाजियों से मस्जिद आने के बजाय अपने-अपने घर में ही नमाज पढ़ने का अनुरोध किया है. गौरतलब है कि आगामी 4 अप्रैल को शब-ए-बरात है. उस दिन रात भर मस्जिदों में मुसलमान इकट्ठा होते हैं और इबादत करते हैं. लेकिन कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर इस बार शब-ए-बरात के मौके पर भी यह नियम चालू रहेगा. रमजान का मुकद्दस महीना आने वाला है. इसलिए लोगों से कोरोना के खतरे से सतर्क रहने का आह्वान किया गया है.

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