बदले की राजनीतीः बीजेपी नेता को थप्पड़ मारने की सजा, सीएम बनते ही शिवराज ने महिला कलेक्टर को हटाया

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पैगाम ब्यूरोः शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस के कुछ गद्दारों की मदद से चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये हैं. मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने बदले की राजनीति शुरू कर दी है.

विधानसभा चुनाव में सूबे की जनता द्वारा नकार दिये जाने के बावजूद चोर दरवाजे से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने कुर्सी संभालते ही सबसे पहले राजगढ़ की महिला कलेक्टर निधि निवेदिता और एसडीएम प्रिया वर्मा को हटा दिया.

राजगढ़ की डीएम निधि निवेदिता उस वक्त मीडिया में छा गयी थीं, जब उन्होंने नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में नारे लगाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को थप्पड़ मार दिया था. उसी दिन शिवराज ने धमकी देते हुए कहा था कि आज का दिन लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन है, जिसे हमलोग कभी नहीं भूलेंगे.

बता दें कि 19 जनवरी को मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में बीजेपी ने सीएए के समर्थन में एक रैली निकाली थी. इलाके में धारा 144 लगा होने की वजह से बीजेपी की रैली को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया था. लेकिन बीजेपी कार्यकर्ता नहीं माने और पुलिस वालों से भिड़ गये थे.

बीजेपी कार्यकर्ता पुलिस के साथ धक्कामुक्की करने लगे और उन्होंने नारेबाजी भी शुरू कर दी थी. जिसपर जिला कलेक्टर निधि निवेदिता ने बीजेपी जिला मीडिया प्रभारी रवि बड़ोने को थप्पड़ मार दिया.

लेकिन बीजेपी कार्यकर्ता नहीं रुके, उन्होंने डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ अभद्रता कर दी. जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. जिसमें कई बीजेपी कार्यकर्ता घायल हो गये थे.

इस घटना के बाद कांग्रेस ने जहां अधिकारियों के काम की तारीफ की थी और उनकी बहादुरी पर गर्व जताया था. वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टर निधि निवेदिता को धमकी देते हुए कहा था कि वह यह न भूलें कि सरकारें स्थायी नहीं होती हैं, वो बदलती हैं. शिवराज ने जो कहा था, उसे पूरा कर दिखाया. कुर्सी संभालते ही उन्होंने अपनी धमकी को हकीकत का रुप देते हुए दोनों महिला अधिकारियों को उनके पद से फौरन हटा दिया.

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