लॉकडाउन में गरीब पस्त, मुनाखोर मस्त

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पैगाम ब्यूरोः कोरोना वायरस से लोगों की जान बचाने के लिए देश भर में 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है. इस तालबंदी में पूरी जिंदगी ठहर गयी है. जहां हर वक्त लोगों का शोर सुनायी पड़ता था, वहां अब मरघट सा सन्नाटा छा गया है. लोग मरने से पहले ही मौत का एहसास महसूस करने लगे हैं. लॉकडाउन का फैसला देश को कोरोना वायरस के खतरे से किस हद तक बचायेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा, लेकिन इतना तो तय है कि इस फैसले ने गरीबों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और किसानों की हालत पतली कर दी है.

लॉकडाउन से जहां गरीब पस्त हैं, वहीं मुनाखोर मस्त हैं. मुनाखोरों की तो जैसे लॉटरी खुल गयी है. संकट की इस घड़ी में भी लाशों के सौदागर मुनाखोर लोगों का खून चूस रहे हैं. हर चीज की कीमत दोगुनी हो गयी है. सब्जी, चावल, आटा, दाल, आलू, प्याज, मसाले, तेल वगैरा के दाम तो पहले ही आसमान को छू रहे थे, लेकिन लॉकडाउन ने तो जैसे इनकी कीमतों में आग लगा दी है.

हर सब्जी के दाम 30-40 रुपये प्रति किलो की दर से बढ़ गये हैं. कल तक जो चिकन 50-60 रुपये किलो भी लोग खरीदने के लिए तैयार नहीं थे. आज उसकी कीमत 200 रुपये किलो हो गयी है. हद तो यह है कि पैकेट पर जो एमआरपी लिखा होता है, दुकानदार उससे भी ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं. सेनिटाइजर के दाम तो मनमाने रुप में वसूला जा रहा है.

एतराज करने पर सभी दुकानदार बस एक ही बात रटने लगते हैं कि हमें खुद ज्यादा दाम दे कर माल खरीदना पड़ रहा है तो हम पहले के दाम पर घाटा उठा कर कैसे बेचेंगे. इस दोहरी मार से लोगों को बचाने वाला कोई नहीं है.
केंद्र की सरकार हो या राज्य सरकारें. सिर्फ घोषणाएं ही हो रही हैं. हकीकत में किसी तरह की मदद नजर नहीं आ रही है. न ही मुनाफाखोरों पर लगाम लगाया जा रहा है. पुलिस प्रशासन तो सिर्फ लोगों को घरों में बंद करने में लगा हुआ है. व्यवसायी किस तरह लोगों को लूट रहे हैं. उस पर उनकी नजर नहीं जा रही है.

किसी सरकार ने प्रत्येक परिवार को हर महीने 5-5 किलो चावल और गेहूं मुफ्त में देने का एलान किया है. तो किसी सरकार ने 1000 रुपये देने की घोषणा की है. मोदी सरकार ने लोगों को 2 रुपये प्रति किलो की दर से गेंहू और 3 रुपये प्रति किलो की दर से चावल देने का एलान किया है. लेकिन यह सब अभी तक एलान के ही रुप में हैं.

तालाबंदी (लॉकडाउन) को तीन दिन हो गये हैं. देश के किसी भी व्यक्ति को किसी भी सरकार की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. लोगों में निराशा के साथ-साथ गुस्सा भी उभर रहा है. अगर जल्द ही सरकार ने मुनाफाखोरों पर लगाम लगाने और आमलोगों को मदद पहुंचाने की कोशिश नहीं की तो देश में बड़ा बवाल हो सकता है. भूख और तंगहाली से परेशान लोग कुछ भी कर सकते हैं.

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