200 साल में पहली बार मस्जिदों में नहीं हुई जुमे की नमाज

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पैगाम ब्यूरोः कोरोना वायरस का खौफ आमलोगों के घरों से बढ़ कर भगवान के घर तक जा पहुंचा है. लॉकडाउन से देश तो बंद हो ही चुका है. मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे और मस्जिदों में भी ताले लग गये हैं. कोरोना वायरस के कारण धर्मस्थलों में भगवान का दर्शन दुर्लभ हो गया है. लोग अब अपने घरों में ही ऊपर वाले को याद कर रहे हैं.

यह कोरोना वायरस का खौफ ही है कि देश की ज्यादातर मस्जिदों में आज जुमे की नमाज नहीं पढ़ी गयी. जानकारों के मुताबिक पिछले 200 साल में यह पहला मौका है जब भारत की मस्जिदों में जुमे की नमाज जमात के साथ अदा नहीं की गयी.

दिल्ली की जाम मस्जिद हो या फिर कोलकाता की नाखुदा मस्जिद या फिर लखनऊ की ऐतिहासिक मस्जिद या फिर देवबंद या बरेली शरीफ. ज्यादातर जगहों पर मस्जिदों में जुमे की नमाज नहीं पढ़ी गयी.

मुसलमान उलेमाओं और मुस्लिम संगठनों ने पहले ही मुसलमानों से यह अपील की थी कि वो नामज घर पर ही पढ़ें. खासकर जुमे की नमाज घर पर ही अदा करें. भीड़भाड़ से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता है. इसलिए मस्जिद में आने की बजाय घरों पर ही नमाज पढ़ना बेहतर है.

मुस्लिम उलेमाओं ने लोगों से सावधानी बरतने और कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की थी. जिस पर मुसलमानों ने लब्बैक कहते हुए मस्जिदों का रुख नहीं किया और अपने-अपने घर में ही “जोहर” (दोपहर की नमाज) की नमाज अदा की.

कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की तरफ से भी मस्जिदों के बाहर पहरा लगाया गया था. कई शहरों में मस्जिदों के बाहर बड़े पैमाने पर पुलिस तैनात की गयी थी. मुस्लिम उलेमाओं और अमन कमेटी के लोगों के साथ बड़े अधिकारी भी वहां मौजूद थे. लेकिन लोग खुद ही नमाज पढ़ने नहीं आये. जिसकी वजह से पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली.

हालांकि सभी मस्जिदों में तय वक्त पर अजान हुई और नामज भी अदा गयी, लेकिन नमाज में इमाम साहेब के साथ तीन-चार ही लोग शामिल हुए.

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