जनता के टैक्स के पैसे पर ऐश करने वाले सांसद और विधायक क्यों नहीं खोल रहे अपनी तिजोरी

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पैगाम ब्यूरोः कोरोना वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. इस महामारी से लड़ने के लिए काफी धन की जरूरत है. इसलिए प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के लिए एक विशेष राहत कोष शुरू किया है, जिसमें देश के बड़े-बड़े उद्योगपति, खिलाड़ी, फिल्मस्टार इत्यादि दान दे रहे हैं. सभी राज्यों में भी मुख्यमंत्री राहत कोष मौजूद है. जिसमें भी लोग अपनी हैसियत के मुताबिक सहायता कर रहे हैं, लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में हमारे जन प्रतिनिधि लोकसभा और राज्यसभा के सांसद और विधायक कहां हैं?

क्या आप जानते हैं? देश मे 543 लोकसभा सांसद, 245 राज्यसभा सांसद और 4116 विधायक हैं. जिनकी कुल तादाद 4910 है. अर्थात संसद और विधानसभाओं के कुल 4910 जनप्रतिनिधि हमारे देश में हैं. इनमें नगर निगम, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि शामिल नहीं हैं. उन्हें अगर इस आंकड़े में शामिल कर दिया जाये तो भारत में जनप्रतिनिधियों की संख्या लाखों हो जायेंगी. हम यहां सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद और देश की सभी विधानसभाओं के विधायकों की बात कर रहे हैं.

अगर यह सारे जनप्रतिनिधि मिलकर अपने निजी बैंक अकाउंट से 5-5 लाख रुपये भारत सरकार को दे दें तो कायापलट हो जायेगी. हमारे ज्यादातर सांसदों और विधायकों के लिए 5 लाख की रकम कोई मायने नहीं रखती है. अगर सभी सांसद और विधायक प्रधानमंत्री राहत कोष में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए 5-5 लाख रुपये देते हैं तो 2,058,000,000 लाख (2 अरब 58 करोड़) रुपये इकट्ठे हो सकते हैं.

लेकिन सरकार सांसदों और विधायकों से मदद मांगने के बजाय देश के लोगों से ही मदद की अपील कर रही है. आखिर सरकार आमलोगों से ही मदद की अपील क्यों करती है? क्या इन राजनेताओं की देश और देश वासियों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं?

मदद के नाम पर कुछ सांसद अपने एक महीने की सैलरी दे रहे हैं. इतनी बड़ी मुसीबत से लड़ने के लिए एक महीने की सैलरी से क्या होगा. आखिर जब विधायक खरीदने की बारी आती है तो कहां से सैकड़ों करोड़ रुपये आ जाते हैं. माननीय जनप्रतिनिधियों की ऐश व आराम की जिंदगी किसी फिल्मस्टार से कम नहीं है.

सबसे बड़ी बात यह है कि यह सांसद और विधायक अपनी अपनी सांसद और विधायक निधि के पैसों को ही खर्च कर वाहवाही लूटते हैं, जबकि वो पैसा इनकी अपनी तिजोरी से नहीं आता है, बल्कि वो पैसा देश की जनता से लिया गया टैक्स का पैसा है, जो देश के लोग टैक्स के रूप मे देश को चलाने और विकास के लिए देते हैं, लेकिन यह सांसद और विधायक जनता का पैसा जनता पर ही खर्च कर इस तरह से एहसान जताते हैं कि जैसे उन्होंने अपनी जेब से पैसा खर्च किया है.

प्रधानमंत्री देशवासियों से तो मदद की अपील कर रहे हैं. आखिर वो सांसदों और विधायकों से मदद की अपील क्यों नहीं कर रहे हैं कि वो अपने बैंक अकाउंट से 5-5 लाख रुपये दें. ये लोग क्या सिर्फ जनता के पैसे द्वारा जनता पर राज करने के लिए आये हैं. आखिर मुसीबत की इस घड़ी में वो अपनी तिजोरी क्यों नहीं खोल रहे हैं?

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