करिश्मा भारतीय रेल काः यूपी जाने वाली ट्रेन पहुंच गयी ओडिशा

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पैगाम ब्यूरोः मोदी सरकार कोरोना पर तो काबू नहीं कर पायी है, लेकिन ये सरकार करिश्मे खूब दिखा रही है. पहले तो बगैर तैयारी के लॉकडाउन लागू करने का करिश्मा दिखाया. फिर मजदूरों को अनाथों की तरह भटकने के लिए रास्ते पर छोड़ दिया. गरीब और असहाय मजदूरों से मदद के नाम पर पूरा किराया वसूलने का करिश्मा तो लोग अभी भी याद कर रहे हैं. अब मोदी सरकार के रेल मंत्रालय ने उससे भी बड़ा करिश्मा कर दिखाया है.

आपने एक पुरानी हिंदी फिल्म का हिट गाना जरूर सुना होगा, “जाना था जापान पहुंच गये चीन समझ गये न.” ऐसा ही कारनामा भारतीय रेल ने कर दिखाया है. मुंबई से रवाना हुई एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन को गोरखपुर पहुंचना था, लेकिन यह ट्रेन भटकते हुए ओडिशा के राउरकेला पहुंच गयी.

वसई रोड-गोरखपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन 21 मई को मुंबई से गोरखपुर के लिए रवाना हुई थी. इस ट्रेन को सबसे छोटे रूट से गुजरना था, लेकिन रेलवे ने इसका रूट बदलकर काफी लंबा कर दिया और यह ट्रेन 8 राज्यों का चक्कर काटकर ओडिशा के राउरकेला पहुंच गयी. इस शानादार कारनामे के लिए जब रेलवे पर उंगली उठी तो अपनी इज्जत बचाने के लिए रेलवे ने कहा कि भारी ट्रैफिक के कारण रुट में बदलाव किया गया था.

पश्चिम रेलवे ने एक बयान में बताया कि 21 मई को रवाना हुई वसई रोड-गोरखपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन के रूट में बदलाव किया गया है. बयान के मुताबिक ट्रेन के मौजूदा रूट में भारी ट्रैफिक के कारण यह बदलाव करना पड़ा. इस ट्रेन को कल्याण, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, नैनी, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन होते हुए गोरखपुर पहुंचना था. उस हिसाब से इसे तीन राज्यों से गुजरना था, लेकिन अब इसका रूट बदल दिया गया और यह ट्रेन 8 राज्यों का चक्कर काटकर ओडिशा पहुंच गयी.

इतनी बड़ी गलती होने के बाद रेलवे के सभी अधिकारी मुंह छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. कोई अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है. रेलवे अपनी गलती को छिपाने के लिए बहाने बना रहा है. लॉकडाउन के कारण देश में रेल सेवा बंद है. आम दिनों में रोजाना औसतन 11000 ट्रेनें चलती हैं, जबकि अभी तो महज कुछ सौ ट्रेनें ही चल रही हैं. इसलिए किसी भी रूट पर भारी ट्रैफिक होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.

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