कोरोना संकट में मोदी सरकार नाकामः ध्यान भटकाने के लिए उठाया जा रहा है अयोध्या का मुद्दा

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पैगाम ब्यूरोः सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद का फैसला हिंदूओं के पक्ष में दे कर मामले को खत्म कर दिया है, लेकिन चंद दिनों से फिर से इस मसले को उभारा जा रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया है, जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि खुदाई में यहां हिंदू मंदिर के अवशेष मिले हैं. यहां अतीत में भी मंदिर था. हालांकि लोग ये समझ नहीं पा रहे हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या का फैसला हिंदुओं के हक में दे चुका है तो फिर ये मुद्दा क्यों सामने आ रहा है. इस पर जानकारों का कहना है कि दरअसल कोरोना संकट और लोकडाउन में प्रवासी मजदूरों के साथ जो कुछ हुआ, उसे देख कर मोदी सरकार चिंता में पड़ गयी है. इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अयोध्या मुद्दे को फिर से उभारा जा रहा है.

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व आईपीएस अफसर एस. आर. दारापुरी भी यही कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में हिंदू मंदिर का दावा मुख्य मुद्दों से ध्यान बटाने का हथकंडा है.

पूर्व आईपीएस अधिकारी एस. आर. दारापुरी ने कहा कि जिस तरह से अयोध्या में मिले अवशेषों का विडियो प्रसारित करके वहां पर हिंदू मंदिर होने का दावा किया जा रहा है वह वास्तव में कोरोना संकट का सामने करने में मोदी सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान बटकाने का हथकंडा है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों, कोरोना मरीजों का टेस्ट, क्वारंनटाईन व्यवस्था, संक्रमित लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ, अर्थव्यवस्था समेत सभी मुद्दों पर बिलकुल नाकाम रही है, जिससे लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा उभर रहा है. इन सबसे ध्यान हटाने के लिए अयोध्या में समतलीकारण से मिले अवशेषों को आधार बना कर वहां पर हिंदू मंदिर होने का फिर से दावा किया जा रहा है. जिस के बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही बिना किसी सुबूत के राम मंदिर के पक्ष में फैसला दे चुका है और इसे सभी पक्षों ने किसी तरह से स्वीकार भी कर लिया है.

उन्होंने कहा कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाला है, जिसमें बीजेपी को हिंदू-मुस्लमान करने की ज़रुरत है. बीजेपी का मंदिर मुद्दा तो अब ख़त्म हो गया है, लेकिन उसे अभी भी चुनाव हित में जिंदा रखने की ज़ुरूरत है.

दारापुरी ने कहा कि जहाँ तक अवशेषों के हिंदू मंदिर के होने का दावा किया जा रहा है, वह भी सरासर गलत है क्योंकि वीडियो में जो कुछ दिख रहा है वह तो पूरी तरह बौद्ध मंदिर के अवशेषों को ही प्रमाणित करता है. इनमें एक धम्म चक्र है जिसके ऊपर बाहरी चक्र में 29, अन्दर के चक्र में 13 तथा सबसे छोटे चक्र में 7 कमल पत्तियां हैं. यह 29 वर्ष की आयु में बुद्ध के गृह त्याग, 10 पारमित्ताओं के साथ 3 त्रिशर्ण तथा बुद्ध के जन्म के तुरंत बाद पूर्व दिशा में चले 7 क़दमों के नीचे कमल के फूलों को इंगित करती हैं. इसी तरह जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है वह वास्तव में छोटा बौद्ध स्तूप है क्योंकि शिवलिंग चोकोर नहीं, गोल होता है. एक द्वार पट्टिका पर कलश होने का दावा भी गलत है क्योंकि वह वास्तव में बुद्ध की तराशी हुयी मूर्ती है, जिन्हें सलग्न चित्रों में देखा जा सकता है.

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