दिल्ली के दंगाई आजाद, दंगों के खिलाफ आवाज उठाने वाली दो लड़कियां गिरफ्तार

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पैगाम ब्यूरोः दिल्ली में दंगे भड़काने वाले तो आजाद पंक्षी की तरह हवाओं में उड़ रहे हैं. जिन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए था, वो पुलिस के पहरे में आजाद घूम रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ नागरिकता कानून (सीएए) दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामला में 2 लड़कियों नताशा और देवांगना को गिरफ्तार किया है.

जफराबाद मेट्रो स्टेशन पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ बड़ी तादाद में महिलाएं प्रदर्शन के लिए जमा हो गयी थीं. उस घटना को आधार पर बना कर दिल्ली पुलिस ने नताशा और देवांगना को गिरफ्तार किया है. दोनों छात्र संगठन पिंजड़ा तोड़ की कार्यकर्ता हैं. दोनों पर दंगा भड़काने का आरोप लगाया गया है.

दिल्ली में दंगे भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस इससे पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. जिन सभी लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वो सभी दिल्ली में नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन से जुड़े हुए थे.
दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और जामिया समन्वय समिति के सदस्य शिफा-उर-रहमान को UAPA के तहत गिरफ्तार किया था. दिल्ली में दंगे भड़काने का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार किया.

जामिया की छात्रा सफूरा जरगर को भी गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है. जबकि वो तीन महीने की गर्भवती हैं. इसके बावजूद अदालत भी उसे जमानत देने के लिए तैयार नहीं है.

शिफा-उर-रहमान, सफूरा जरगर के साथ-साथ मीरान हैदर, जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी हैं. चंद दिन पहले दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने जामिया यूनिवर्सिटी के छात्र आसिफ तन्हा को गिरफ्तार किया. आसिफ तन्हा पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है.

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में साजिश रचने का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस ने जिन छात्रों या पूर्व छात्रों को गिरफ्तार किया है. उन सबके खिलाफ UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी है, ताकि उन्हें जमानत न मिले और वो लंबे वक्त तक जेल में सड़ते रहें.

वहीं जिन कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा जैसे बीजेपी नेताओं को पूरी दुनिया ने दंगे भड़काते हुए खुली आंखों से देखा था, उन्हें गिरफ्तार करना तो दूर, उनके खिलाफ एक एफआईआर तक दर्ज नहीं किया गया है. बीजेपी के ये सभी सूरमा खुलेआम घूम रहे हैं.

दिल्ली पुलिस की इस पूरी कार्रवाई के पीछे गृह मंत्री अमित शाह का दिमाग है. जो सीएए और एनआरसी आंदोलन को पूरी तरह कुचल देना चाहते हैं. अमित शाह को पता है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन खत्म होने के बाद सीएए के खिलाफ फिर से आंदोलन शुरू होगा. उनकी योजना है कि जो लोग इस आंदोलन को नेतृत्व दे रहे थे, अगर उन्हें ही जेल में डाल दिया जायेगा तो कोई भी फिर आंदोलन करने की हिम्मत नहीं करेगा. इसलिए सीएए आंदोलनकारियों पर दिल्ली में दंगा भड़काने का आरोप लगा कर उन्हें धड़ाधड़ गिरफ्तार किया जा रहा है. वहीं दंगे के असली आरोपी आजादी से घूम रहे हैं.

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