खुल गया गुजरात मॉडल का पोलः कोरोना से निपटने पर अदालत ने बीजेपी सरकार को लगायी फटकार

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पैगाम ब्यूरोः बीजेपी और नरेंद्र मोदी विकास के जिस गुजरात मॉडल का ढोल पीटते रहते हैं, उसकी पोल एक बार फिर से खुल गयी है. गुजरात हाईकोर्ट ने सारी दुनिया के सामने गुजरात मॉडल की हकीकत को खोल कर रख दिया है. कोरोना से निपटने पर अदालत ने गुजरात की बीजेपी सरकार को जम कर फटकार लगायी है.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल की हालत बेहद ‘दयनीय’ है और यह अस्पताल ‘कालकोठरी जैसा है, यहां तक कि उससे भी ज्यादा बदतर’.

कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन पर स्थिति का जनहित याचिका के रूप में स्वत: संज्ञान लेते हुए जस्टिस जे. बी. परदीवाला और जस्टिस आई. जे. वोरा की बेंच ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की हालत पर राज्य सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई और कहा कि यह ‘निराशाजनक और दुखद है.’

इस अस्पताल में कोविड-19 से शुक्रवार तक 377 मरीजों की जान चली गयी जो इस अविध में सभी अस्पतालों में हुई 638 मौतों में एक बड़ा आंकड़ा है. अदालत ने कहा कि यह काफी निराशाजनक और दुखद है कि आज की तारीख में सिविल अस्पताल की दशा दयनीय है. हम यह कहते हुए दुखी हैं कि आज की तारीख में सिविल अस्तपाल अहमदाबाद बहुत ही बदतर स्थिति में है.

बेंच ने कहा कि जैसा कि हमने पहले कहा कि यह सिविल अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए है, लेकिन ऐसा जान पड़ता है कि आज की तारीख में यह कालकोठरी जैसा है या यूं कहें कि उसे भी बदतर. दुर्भाग्य से गरीब और बेसहारा मरीजों के पास विकल्प नहीं है. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तनिक भी भान है कि अस्पताल में क्या चल रहा है.

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