सिखों ने पेश की मिसालः ईद से पहले जामा मस्जिद को किया सेनेटाइज

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पैगाम ब्यूरोः भारत में सोमवार को ईद-उल-फितर मनायी जायेगी. इस बार की ईद एक अजीब ईद होगी. कोरोना संकट और लॉकडाउन के चलते दुनिया भर की ज्यादातर मस्जिदों में ईद की नमाज नहीं होगी. अरब देशों में रविवार को ईद मनायी गयी, लेकिन वहां भी इस मौके पर मस्जिदें बंद रहीं. लोगों ने घरों पर ही इबादत कर अल्लाह को याद किया.

भारत में लॉकडाउन के दौरान लोग बगैर किसी भेदभाव के एक-दूसरे की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. भाईचारे और मदद की एक मिसाल पेश करते हुए सिख समुदाय के लोगों ने ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़ से पहले रविवार को दिल्ली की जामा मस्जिद को कोरोना संकट के बीच सेनेटाइज़ किया.

जामा मस्जिद को सेनेटाइज करने आयी सिखों की टीम में शामिल परमिंदर सिंह ने कहा कि हम सिर्फ मस्जिद ही नहीं बल्कि चर्च और मंदिरों की भी सफाई कर रहे हैं. हम धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं. जब हम अपनी पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब के साथ चलते हैं, तो सभी धर्म और उनके अनुयायी हमारे लिए समान हैं. हमारी पवित्र पुस्तक में लिखा गया है कि हम सभी ईश्वर की रचना हैं. हम मंदिरों और गिरजाघरों को भी पवित्र कर रहे हैं. परमिंदर सिंह पिछले 50-60 दिनों से ये काम कर रहे हैं.

इस मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद शाह बुखारी ने कहा कि देश में यह वक्त की जरूरत है कि लोग एक-दूसरे का ख्याल रखें. जिस तरह से सिख समुदाय के लोगों ने जामा मस्जिद को पवित्र किया वह इस देश की खुबसूरती है. कोरोनो वायरस के खिलाफ लड़ाई के बीच, एक दूसरे की मदद करना बेहद अहम है. मुझे उम्मीद है कि देश की यह सुंदरता बनी रहेगी.

बता दें कि सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि कोरोनो वायरस के खिलाफ लड़ाई के बीच, देश भर में लोग बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे की मदद कर रहे है. जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन ने रमजान के महीने के दौरान सेहरी और इफ्तारी का इंतजाम किया. यहां लगभग 500 मुसलमानों को रखा गया था. इसे एक क्वारंटाइन सेंटर में परिवर्तित किया गया था.

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