बीजेपी सरकार का श्रमिक प्रेमः टॉयलेट में रखा जा रहा है मजदूरों को

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पैगाम ब्यूरोः नोटबंदी में भी देश के गरीबों और आमलोगों का बुरा हाल हुआ था, लेकिन लॉकडाउन ने सबकुछ पीछे छो़ड़ दिया है. मजदूरों की दुर्गति देख कर तो शैतान तक हैरान-परेशान है. सरकार ने मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया है. वे पैदल घर जाने के लिए मजबूर हैं. सड़क हादसों में उनकी जान जा रही है. घर पहुंचाने के नाम पर तो उनके साथ मजाक किया जा रहा है. ट्रेनें रास्तों से भटक जा रही हैं. जिन्हें बसों के जरिये लाया जा रहा है. उनका भी बुरा हाल है. मजदूरों की बेबसी का इससे बुरा हाल क्या हो सकता है कि उन्हें सार्वजनिक शौचालय में रखा जा रहा है.

बीजेपी सरकार का श्रमिक प्रेम देख कर रुह कांप जा रही है. मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में प्रवासी श्रमिकों को टॉयले में रहने के लिए मजबूर किया गया है.

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोटा नाका इलाके में प्रवासी मजदूरों को यहां पर बने शौचालय में ठहराया गया है. यहीं पर ये लोग खाना बनाने और खाने-पीने के लिए मजबूर हैं. सरकार की तरफ से खाना मिल रहा है, लेकिन खाने की क्वालिटी बेहद खराब है.

मजदूर महिलाओं का कहना है कि हम लोगों को शौचालय में ठहराया गया है. हम जयपुर से यहां आये हैं. जहां हमलोग बेलदारी का काम करते थे. यहां खाने के नाम पर रोटियां कच्ची मिल रही हैं. ऐसे में तबीयत खराब होने का खतरा है. यहां आस-पास कोई डॉक्टर तक नहीं है.

बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों को मध्य प्रदेश की सीमा तक गाड़ियों से छोड़ दिया जाता है. जयपुर के नाके पर करीब 250 मजदूरों को छोड़ा गया है. उनके घर छोड़ने की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सरकार की है. लेकिन सरकार ने उन्हें घर भेजने की बजाय उन्हें टॉयलेट में रख दिया है.

इस बारे में मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारी ठीक से कोई जवाब देने के बजाय मामले की जांच करने की बात कर रहे हैं. पूरी दुनिया इन मजदूरों की बदहाली देख रही है, लेकिन अधिकारी महोदय अभी जांच करेंगे. जिले के अपर कलेक्टर दावा कर रहे हैं कि हमने प्रवासी मजदूरों के ठहरने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की है. शौचालय में रुकने के मामले की हम जांच करेंगे और जिसकी भी लापरवाही होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

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