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डाकू लूट ले गये राम जन्मभूमि के मालिकाना अधिकार के दस्तावेज

पैगाम ब्यूरोः बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद में अब एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है. राम जन्मभूमि निर्माण के लिए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर दावा ठोंकने वाली निर्मोही अखाड़ा के पास मालिकाना अधिकार का कोई सबूत ही नहीं है.

मध्यस्थता पैनल द्वारा मामले का समाधान नहीं निकलने के बाद 6 अगस्त से अयोध्या विवाद की सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हुई है. खुली अदालत में चल रही सुनवाई के दूसरे दिन आज सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि का पक्ष रख रहे निर्मोही अखाड़े से जमीन पर कब्जे के संबंध में कागजी सबूत मांगे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने निर्मोही अखाड़े से पूछा कि क्या आपके पास राम जन्‍मभूमि पर मालिकाना अधिकार को लेकर कोई मौखिक या कागजी सबूत या रेवेन्‍यू रिकॉर्ड है. इस पर निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने जवाब देते हुए कहा कि 1982 में हुई डकैती में सारे रिकॉर्ड गायब हो गये.

अयोध्या विवाद पर रोजाना सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता है. निर्मोही अखाड़ा ने मंगलवार को मांग की थी कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर उनका नियंत्रण और प्रबंधन हो. क्योंकि पूरे विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश करने पर मनाही है. 

निर्मोही अखाड़ा के वकील ने अदालत को बताया था कि 1961 में वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर दावा ठोका था, लेकिन हम वहां पर सदियों से पूजा करते आ रहे हैं. हमारे पुजारी ही प्रबंधन को संभाल रहे थे. निर्मोही अखाड़े ने अदालत से कहा कि जमीन पर हमारा हक है. हमसे पूजा का अधिकार छीना गया है. अदालत विवादित जमीन पर हमारा अधिकार फिर से बहाल करे.


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(धन्यवाद)