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कश्मीर के नेताओं की एक साल तक रिहाई की नहीं है उम्मीद

पैग़ाम ब्यूरो: केंद्र सरकार दावा कर रही है कि  अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बावजूद जम्मू कश्मीर में शांति बनी हुई है. सरकारी दावे के मुताबिक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. सरकार के इस दावे के बीच ये सवाल उठने लगा है कि अगर वाकई घाटी में शांति है तो फिर गिरफ्तार किये गये नेताओं को कब रिहा किया जायेगा. इस सवाल का जवाब तो अभी तक नहीं मिला है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिए गये विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, अलगाववादियों और अन्य लोगों की जल्द रिहाई की उम्मीद नहीं है. कुछ अधिकारियों की अगर मानें तो इन्हें एक साल तक बंद रखा जा सकता है.

बता दें कि कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी तरह के राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों की संभावना को टालने के लिए राज्य प्रशासन ने पिछले आठ दिनों के दौरान करीब 700 लोगों को हिरासत में लिया है. इनमें से करीब 150 लोगों को दूसरे राज्यों की जेलों में भेज दिया गया है.

गिरफ्तार किए जाने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस  उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं.  अधिकारिक तौर पर कोई भी  अधिकारी इन दोनों नेताओं के बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं.

जम्मू कश्मीर में पिछले एक हफ्ते के दौरान हुई गिरफ्तारियों की तादाद का ब्योरा भी देने के लिए कोई  तैयार नहीं है. राज्य सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल भी उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर लगायी गयी  कानूनी धाराओं का ब्योरा देने के बारे में बताने से बचते नजर आ रहे हैं.

राज्य प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि विभिन्न नेताओं और अन्य लोगों को इसलिए एहतियातन हिरासत में लिया गया है. ताकि कोई भी हिंसा को भड़काने का काम न कर पाये. खबर है कि इनमें से कइयों को 'जन सुरक्षा अधिनियम' के तहत बंदी बनाया गया है.

अधिकारी के मुताबिक हालात सामान्य होने पर कुछेक राजनीतिक नेताओं को छोड़ा जा सकता है. लेकिन कई लोगों को राज्य प्रशासन विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत अगले एक साल तक बंद रख सकता है.


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