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फिर से लाया जायेगा नागरिकता संशोधन बिल, हिंदुओं को बिना शर्त दी जायेगी नागरिकता

पैगाम ब्यूरोः बीजेपी असम में एनआरसी पर अपने ही बिछाये जाल में फंस चुकी है. एनआरसी अब बीजेपी के गले की हड्डी बन चुका है. इससे बचने के लिए बीजेपी फिर से नागरिकता संशोधन बिल लाने जा रही है. यह बिल अगर पास हो जाता है तो एनआरसी की फाइनल लिस्ट में जगह पाने में नाकाम रहे 12 लाख हिंदुओं को बगैर किसी शर्त के अपने आप ही भारत की नागरिकता मिल जायेगी.

एनआरसी पर बीजेपी की योजना फ्लॉप हो चुकी है. पार्टी को उम्मीद थी कि एनआरसी का निशाना ज्यादातर मुसलमान बनेंगे और उन्हें एनआरसी के नाम पर विदेशी बता कर उनसे हर अधिकार छीन लिया जायेगा, लेकिन जब एनआरसी की फाइनल लिस्ट आयी तो बीजेपी के होश उड़ गये.

एनआरसी में 19 लाख लोग अपना नाम दर्ज कराने में नाकाम रहे हैं, जिनमें 12 लाख हिंदू हैं. हिंदुओं में बड़ी तादाद असम के मूल निवासी आदिवासियों की है. लिस्ट सामने आते ही विरोध शुरू हो गया. बीजेपी के अंदर से भी इसके खिलाफ आवाज उठ रही है.

इससे बचने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नागरिकात संशोधन बिल को हथियार बनाने का फैसला किया है. दो महीने बाद संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल पेश किया जायेगा. अगर यह बिल पास हो जाता है तो एनआरसी की लिस्ट में नाम शामिल कराने में नाकाम रहे 12 लाख हिंदुओं को भारत की नागरिकता मिल जायेगी. सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का नारा देने वाली बीजेपी मुसलमानों के बारे में क्या सोचती है. बीजेपी की इस योजना से एक बार फिर उसका खुलासा हो गया है.

हालांकि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में नागरिकता संशोधन बिल पेश किया था, लेकिन उसे पास कराने में कामयाबी नहीं मिली थी. पूर्वोत्तर के राज्य भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं. लेकिन वर्तमान में विपक्षी दलों का जो रवैया है और विरोध के नाम पर राज्यसभा से वाकआउट करने का विपक्षी दल जो नाटक कर रहे हैं, वैसे में मोदी सरकार के लिए इस बिल को पास कराना पहले की तरह मुश्किल नहीं होगा.


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