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Kolkata

कैंसर के इलाज में जागरूकता की सख्त जरूरत

पैगाम ब्यूरोः दुनिया भर में कैंसर का रोग तेजी से बढ़ रहा है. सबसे चिंता की बात यह है कि एक लंबा अरसा गुजर जाने के बावजूद अभी तक इस रोग का संपूर्ण इलाज सामने नहीं आया है. जिसकी वजह से हर साल लाखों लोगों को कैंसर का शिकार हो कर अपनी जान गंवानी पड़ती है. 

भारत में भी एक की तस्वीर है. गंभीर बात यह है कि आज भी कैंसर का इलाज करवाने के लिए मरीजों को बड़े शहर का चक्कर लगाना पड़ता है. देश में गिने-चुने ही कैंसर अस्पताल हैं, जिनमें कोलकाता का चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान भी शामिल है.

 चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान भारत के 25 क्षेत्रीय कैंसर केंद्र में से एक है.  इसकी स्थापना महान स्वतंत्रता सेनानी चित्तरंजन दास की याद में 2 जनवरी 1950 को की गयी थी और तब इसका नाम "चितरंजन कैन्सर अस्पताल" रखा गया था. ये अस्पताल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय भारत सरकार के अधीन आता है.

कुछ साल पहले चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत बेहद खराब थी, लेकिन अब यहां काफी सुधार हुआ है. रोजाना सैकड़ों मरीज यहां अपना इलाज करवाने आते हैं. अस्पताल के सुपर डॉं. जयन्त चक्रवर्ती ने कहा कि कैंसर के प्रति जागरुक्ता की सख्त जरूरत है. कैंसर का अभी पूरी तरह इलाज सामने नहीं आया है, लेकिन कई ऐसे प्रकार के कैंसर हैं, जिन्हें जांच के दौरान शुरुवात में ही पकड़ा जाता है. इससे मरीज का इलाज संभव हो पाता है. 


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