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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रमुख का दावाःभारत में साफ दिख रही है मंदी

पैगाम ब्यूरोः मोदी सरकार दावा कर रही है कि देश में किसी तरह की आर्थिक मंदी नहीं है. खुद को सांस्कृतिक संगठन बताने वाले आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत भी अब अर्थव्यवस्था पर देश को ज्ञान देने लगे हैं और यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि मंदी सिर्फ कुछ लोगों की दिमाग की उपज है. बाकी सब ठीक है, लेकिन दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) प्रमुख ने मोदी सरकार और आरएसएस के सभी दावों की हवा निकाल दी है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नयी प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जियॉरजीवा का कहना है कि वैसे तो इस वक्त समूचे विश्व की अर्थव्यवस्थाएं समकालिक मंदी की चपेट में हैं, लेकिन भारत जैसी सबसे बड़ी उभरती बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं में इस साल इसका असर ज़्यादा साफ नज़र आ रहा है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका तथा जर्मनी में बेरोज़गारी ऐतिहासिक निचले स्तर पर है. फिर भी अमेरिका, जापान तथा विशेष रूप से यूरो क्षेत्र की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों में नर्मी देखी गयी है. लेकिन भारत और ब्राज़ील जैसी कुछ सबसे बड़ी उभरती बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं में इस साल मंदी का असर ज़्यादा साफ नज़र आ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक ने कहा कि वैश्विक व्यापारिक वृद्धि लगभग थम गयी है. आईएमएफ ने घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद से कम संभावना के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 0.3 प्रतिशत की कमी कर उसे सात फीसदी कर दिया है.

क्रिस्टालिना जियॉरजीवा ने कहा कि चौतरफा फैली मंदी का अर्थ है कि वर्ष 2019-20 के दौरान वृद्धि दर इस दशक की शुरुआत से अब तक के निम्नतम स्तर पर पहुंच जायेगी. जिसकी वजह से दुनिया का 90 फीसदी हिस्सा कम वृद्धि का सामना करेगा.


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