अमीर बाप के बच्चों को लाने के लिए भेज दी 300 एसी बस, गरीब के घर से निकलने पर बरस रही लाठी

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पैगाम ब्यूरोः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्थान के कोटा में फंसे 7500 छात्रों को लाने के लिए 300 एसी बसें भेज दीं. जिन पर सवार हो कर ये छात्र लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन और अपने बाप-दादा की शान का बखान करते हुए अपने-अपने घरों को लौट गये.

यूं तो लॉकडाउन के चलते लाखों छात्र देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राजस्थान के कोटा में कोचिंग करने वाले छात्रों के प्रति इतनी दया दिखाने के एक बड़ा कारण हैं. और वो कारण है इन छात्रों के परिवार की आर्थिक व सामाजिक स्थिति.

कोटा में कोचिंग करना हर किसी के बस की बात नहीं है. आर्थिक रुप से संपन्न परिवारों के बच्चे ही यहां मोटी फीस देकर पढ़ने आते हैं. सीएम योगी ने जिन छात्रों को लाने के लिए 300 एसी बसें भेंजी, वो सभी सामाजिक और आर्थिक रुप से बेहद संपन्न परिवार के हैं. जो अपनी बात सरकार तक पहुचाने की क्षमता और हैसियत रखते हैं.

दूसरी तरफ देश के लाखों मजदूर हैं, जो अपने घर से सैड़कों किलोमीटर दूर बगैर काम और पैसे के लॉकडाउन में फंसे हुए है. लेकिन न तो सीएम योगी को उनकी याद आ रही है न पीएम मोदी को. क्योंकि वो गरीब और मजदूर हैं. उनकी हैसियत सिर्फ वोट देने तक की है. वोट देने के बाद उसका फायदा उठाना उनकी किस्मत और औकात में शामिल नहीं है.

उत्तर प्रदेश के हजारों मजदूर मुंबई में भूखे-प्यासे फंसे हुए हैं. जो लॉकडाउन खत्म होने की उम्मीद लेकर 14 अप्रैल को मुंबई के बांद्रा स्टेशन पहुंच गये थे. उन्हें लगा था कि पीएम मोदी उनके लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था करेंगे, लेकिन ट्रेन की जगह उन्हें पुलिस की लाठी खाने को मिली.

गरीबों और मज़दूरों के लिए बसें नहीं चलाई जा सकतीं हैं. उनका नाम आते ही लॉकडाउन के नियम और कोरोना वायरस का भय दिखाया जाने लगता है. अगर फिर भी नहीं मानते हैं तो पैदल जायें, सड़कों पर पुलिस की लाठी-मार खायेंगे. सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने के बाद अगर ज़िंदा बच गये तो किसी तरह घर पहुंच ही जायेंगे. लॉकडाउन तो सिर्फ गरीबों के लिए है. पैसों वालों के लिए तो ये हॉलिडे पैकेज है. जहां सिर्फ आनंद ही आनंद है.

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