सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहाः कोरोना के बहाने मुसलमानों को बनाया जा रहा है निशाना

0
464

पैगाम ब्यूरोः सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्केंडेय काटजू ने इल्जाम लगाया है कि कोरोना के बहाने मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है. देश में कोरोना महामारी को सांप्रदायिक रंग दिये जाने की कोशिश के विषय पर जस्टिस काटजू ने एक लेख लिखा है. जिसमें उन्होंने कहा है कि मीडिया का एक वर्ग पूरी ताकत के साथ ये बताने की कोशिश कर रहा है कि कोरोना फैलाने के लिए तबलीगी जमात पूरी तरह जिम्मेदार है.

जस्टिस काटजू ने कहा कि मीडिया के इस वर्ग ने मुसलमानों को आतंकी और राष्ट्र विरोधी के रुप में पेश किया है. जिसके बाद देश भर में मुसलमानों पर हमले होने और उनके साथ भेदभाव किये जाने की खबरें आने लगी हैं.

जस्टिस काटजू ने इस लेख में कहा कि मीडिया चैनलों ने तबलीगी जमात प्रमुख मौलाना सद को एक शैतान के रुप में पेश किया है. पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 304 (गैर इरादतन कत्ल) के तहत मामला दर्ज किया है. उनके घर पर छापा भी मारा गया है. जिसकी वजह से शायद वो डर गये हैं.

राजस्थान की एक घटना को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने लिखा कि भरतपुर के एक सरकारी अस्पताल ने एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना कर दिया, क्योंकि वो मुसलमान थी. वक्त पर भर्ती नहीं किये जाने से उस मुस्लिम महिला के बच्चे की मौत हो गयी, लेकिन इस घटना की जांच में ये दिखाने की कोशिश की गयी कि डॉक्टर को शक था कि उस महिला या उसके परिवार का संबध तबलीगी जमात से था.

उन्होंने लिखा कि मीडिया द्वारा फैलाये गये झूठ के चलते पंजाब के मुस्लिम गुर्जरों को दूध बेचने में दिक्कत हो रही है. कर्नाटक में मुसलमानों का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है.

जस्टिस काटजू ने लिखा कि मीडिया दावा कर रही है कि तबलीगी जमात के लोग सुपर स्प्रेडर (फैलाने वाले) हैं. कुछ लोग मांग कर रहे हैं कि उन्हें गोली मार देनी चाहिए. उन पर स्वास्थ्य कर्मियों पर थूकने, नर्सों के साथ दुर्व्यवहार करने, पेशाब से भरी बोतल फेंकने, अस्पताल के वार्ड में शौच करने और खाने के लिए चिकन बिरयानी मांगने का आरोप लगाया जा रहा है. जबकि ये सारी इल्जाम बेबुनियाद हैं. अस्पताल प्रबंधन ने इन बातों को गलत बताया है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here