अरब देशों में बढ़ रहा है गुस्सा, इसलिए पीएम मोदी को आयी सभी धर्मों की याद

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पैगाम ब्यूरोः देश में खुलेआम घूम रहे सांप्रदायिकता के वायरस पर खामोश रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पहली बार कहा कि कोरोना हमला करने से पहले धर्म, जाति, रंग, भाषा और सीमाएं नहीं देखता है. मुश्किल वक्त में हम सबको साथ मिलकर इस चुनौती से निपटने की जरूरत है.

प्रधानमंत्री के इस बयान की खूब तारीफ हो रही है, लेकिन हमेशा की तरह प्रधानमंत्री का ये बयान उस वक्त आया, जब सांप इंसान को डसने के बाद बिल में जा छिपा है. गोदी मीडिया, आईटी सेल और भगवा संगठनो ने जहर फैलाने का अपना मिशन पूरा कर दिया है, उसके बाद अब प्रधानमंत्री लोगों को शांति और सदभावना का संदेश दे रहे हैं.

इस संदेश के पीछे भी एक कहानी है. भारत में कोरोना के नाम पर जिस तरह से मुसलमानों पर अत्याचार होने लगा है और इस वायरस के फैलने के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. इसका दुनिया भर में विरोध हो रहा है. खासतौर पर अरब देशों में तो इससे बेहद नाराजगी है.

कल तक जो अरब देश और वहां के लोग भारत में मुसलमानों के खिलाफ होने वाली किसी भी घटना पर खामोश रहते थे, वो अब कोरोना को मुसलमानों से जोड़ कर उनपर किये जा रहे अत्याचार के खिलाफ खुल कर बोलने लगे हैं. भारत में मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अत्याचार का खमियाजा अरब देशों में काम कर रहे हिंदुओं को चुकाना पड़ रहा है. सिर्फ यही नहीं, अब तो अरब देशों में भारत और भारतीयों सामानों का बहिष्कार किये जाने की मांग उठने लगी है. संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मुसलमानों का मुद्दा उठाये जाने की बात की जा रही है.

अरब देशों में यह स्थिति भारत के लिए एक बड़ा खतरा है. देश का ज्यादातर कारोबार और विदेशी मुद्रा अरब देशों से ही आता है. सबसे बड़ी बात ये है कि यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो रही है, जो लंबे अरसे से भारत के साथ अरब देशों के अच्छे संबंधों को खत्म करने की कोशिश में लगा हुआ है. अब खुद गोदी मीडिया, बीजेपी आईटी सेल और भगवा संगठनों ने पाकिस्तान को ये सुनहरा मौका दे दिया है.

बता दें कि पिछले चंद दिनों में यूएई और कुवैत से कई भारतियों को निकाल बाहर किया गया है. इन लोगों ने सोशल मीडिया पर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किया था.

6 COMMENTS

  1. Main Hindu Dharm par ya hindu par nahi kah raha hoon jo log nafrat ka beej bote hain chahe wo kisi desh men ho usper sakht kadam uthane chahiye

    • bilkul. kisi bhi dharm ke khilaf nahin bolna ya likhna chahiye. kabhi bhi nahi. islam bhi iski ijazat nahi deta hai.

  2. ये लोग सत्ता के नशे में ये भूल गए कि इनकी नेतागिरी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि भक्तो तक ही सीमित है अगर ये लोग संवैधानिक पदो पर ना होते या सिक्योरटी में ना होते अभी तक सल्लाखो के पीछे पहुंच गए होते

    • सही कहा, लेकिन हर फिरऔन के लिए अल्लाह एक मूसा पैदा करता है. इनका जवाल भी जरूर आयेगा

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