पालघर साधु हत्या मामले में मुसलमानों को फंसाने की कोशिश नाकाम, ज्यादातर आरोपी बीजेपी समर्थक

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पैगाम ब्यूरोः महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके गाड़ी के ड्राईवर की हत्या के मामले में एक बड़ा ट्वीस्ट आ गया है. भगवा संगठन, आईटी सेल और गोदी मीडिया अब तक इस घटना को मुसलमानों से जोड़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी कोशिश पूरी तरह नाकाम हो गयी है.

साधुओं की हत्या करने के आरोप में पुलिस ने 110 लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में एक भी मुसलमान नहीं है. मरने वाले और मरने वाले सभी एक ही धर्म के हैं. महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख भी बार-बार यही दोरहा रहे थे. सूत्रों के अनुसार जिल इलाके में ये घटना हुई है, उस इलाके में बीजेपी का दबदबा है.

शुक्रवार को महाराष्ट्र के पालघर जिले में लोगों की भीड़ ने बच्चा चोर के शक में दो साधुओं और एक ड्राईवर की हत्या कर दी. जिस गांव में यह घटना हुई है, उसका नाम गडचिंचले है. उस पंचायत पर बीजेपी का राज है. पुलिस ने इस घटना में बीजेपी की सरपंच चित्रा चौधरी को भी गिरफ्तार किया है.

भगवा संगठन, आईटी सेल और मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस घटना को मुसलमानों से जोड़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार और पुलिस ने इस पूरी साजिश को नाकाम बना दिया है. जिसकी वजह से अब इस मामले को नया एंगल देने की कोशिश की जा रही है.

अब बीजेपी इस घटना को वामपंथियों से जोड़ने की कोशिश कर रही है. मुसलमानों को फंसाने में नाकाम रहने के बाद अब बीजेपी इस घटना को माकपा (सीपीआईएम) के सर डालने के प्रयास में जुट गयी है.

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर ने ट्वीट कर कहा है, “भारत में कोई भी आदिवासी तब तक भगवा पहने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता जब तक कि उसका ब्रेनवाश नहीं किया जाता. पालघर लिंचिंग क्षेत्र कम्युनिस्टों का गढ़ है, यहां तक ​​कि स्थानीय (दहानू) विधायक भी सीपीआईएम (माकपा) से संबंधित है.” महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए बीजेपी नेता ने कहा, “उद्धव ठाकरे के अराजक शासन में मार्क्सवादी गुंडों ने 2 पवित्र द्रष्टाओं की मॉब लिंचिंग कर दी.”

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