40 दिनों बाद अमित शाह को आयी मजदूरों की याद, सीएए आंदोलनकारियों को निपटाने में थे व्यस्त

0
512

पैगाम ब्यूरोः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लॉकडाउन के दौरान पहली बार बयान जारी किया है. ये बयान उन्होंने किसी की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए किया है. देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद उन्हें पहली बार प्रवासी मजदूरों की याद आयी है. इतने दिनों के बाद अब जा कर उन्हें इन प्रवासी मजदूरों की मजबूरी और दुख का एहसास हुआ है. लेकिन इसके लिए खुद की सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाय उन्होंने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर एक बेतुका आरोप लगा दिया है.

अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी की सरकार प्रवासी मजदूरों को राज्य में घुसने नहीं दे रही है. उनकी ट्रेन को पश्चिम बंगाल में आने से रोका जा रहा है.

इस आरोप पर ममता बनर्जी के भतीजे व सांसद अभिषेक बनर्जी ने अमित शाह पर पलटवार करते हुए कहा कि अमित शाह हफ्तों चुप्पी साधे रहने के बाद अब झूठ बोल कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं. वो अपने इल्जाम को साबित करें या माफी मांगें.

कांग्रेस ने भी अमित शाह पर निशाना साधा है और कहा है कि गृह मंत्री को ऐसा ही पत्र कर्नाटक और गुजरात के मुख्यमंत्रियों को भी लिखना चाहिए क्योंकि उनकी सरकारें मजदूरों को घर जाने से रोक रही हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि हैरत इस बात की है कि लॉकडाउन में अमित शाह ने पहली बार बयान दिया है. उन्हें मजबूर मजदूरों के बारे में बात करने में 40 दिन लग गये. जब देश में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लोग परेशान थे, मजदूर मर रहे थे तो वह कुछ नहीं बोले. इस बात को यह देश याद रखेगा.

दरअसल अमित शाह, कोरोना से भी जरूरी काम में व्यस्त थे. वो सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को ठिकाने लगा रहे थे. लॉकडाउन में जब दुनिया घरों में दुबकी पड़ी थी, तब अमित शाह के फरमान पर दिल्ली पुलिस नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को चुन-चुन कर गिरफ्तार कर रही थी. उनके खिलाफ UAPA लगाया जा रहा था. दिल्ली दंगों का आरोपी कपिल मिश्रा सीना ताने घूम रहा है और सीएए के खिलाफ आवाज उठाने वाली गर्भवती छात्रा सफूरा जरगर को दंगों का मास्टरमाइंड बता कर तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है.

अमित शाह का ये मिशन पूरा हो गया है. इसलिए अब उन्हें देश के मजदूर याद आने लगे हैं. मजदूरों में भी वो राजनीति का रंग तलाश कर रहे हैं. उन्हें मध्य प्रदेश के वो 16 मजदूर याद नहीं आये, जिन्हें ट्रेन काटती हुई चली गयी. उन्हें यूपी, गुजरात, बिहार के असहाय मजदूर नजर नहीं आये. उन्हें सिर्फ पश्चिम बंगाल के मजदूरों की याद आयी, क्योंकि यहां बीजेपी की नहीं, ममता बनर्जी की सरकार है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here