योगी महाराज की जय होः शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले आईपीएस अफसर का तबादला

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पैगाम ब्यूरोः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार देश की मोदी सरकार से किसी भी तरह से कम नहीं है. मोदी सरकार की तरह योगी सरकार भी रोजाना नये-नये कारनामे दिखा रही है. योगी राज में सरकार से सवाल करना देशद्रोह है और सरकारी काम में घोटालों को दुनिया में सामने लाने वाले अफसरों को शाबासी की जगह सजा मिलती है. ऐसा ही इलाहाबाद (प्रयागराज) के आईपीएस अफसर के साथ हुआ है. जिनका 69 हजार शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा करने के अपराध में ताबदला (ट्रांस्फर) कर दिया गया है.

देर रात गये योगी सरकार ने 14 आईपीएस अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया. इस तालिका में प्रयागराज के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का भी नाम शामिल है.

सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने ही राज्य के बहुचर्चित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा किया था. इस मामले में कई गिरफ्तारी भी हुई हैं. अब इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही है. फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी चंद्रमा यादव अभी तक फरार है. चंद्रमा यादव खुद को उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सिद्धार्थनाथ सिंह का प्रतिनिधि बताता है.

शिक्षक भर्ती में घोटाले का खुलासा करने वाले प्रयागराज के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को इस काम के लिए सरकार से शाबासी मिलने के बजाय ट्रांस्फर कर दिया गया है. उनके साथ जिन दूसरे आईपीएस अफसरों का ट्रांस्फर किया गया है. उन्हें दूसरे पद की जिम्मेदारी दे दी गयी है, लेकिन सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को पद से हटाने के बाद अभी नयी तैनाती नहीं दी गयी है, उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है.

69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में कई अभ्यार्थी घोटाले का आरोप लगा रहे थे. लेकिन पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही थी. जैसे ही एक अभ्यार्थी ने एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से संपर्क किया. वो फौरन हरकत में आ गये और कार्रवाई शुरू कर दी. वो और उनकी टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटे के अंदर इस फर्जीवाड़े के एक मुख्य आरोपी डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया. इन सबके पास से 22 लाख रुपया नकद भी बरामद हुआ.

शिक्षक भर्ती घोटाले के तार काफी ऊपर तक गये हुए हैं. विपक्ष इसकी सीबीआई से जांच करवाने की मांग कर रहा है. योगी सरकार पर आरोपियों को बचाने का आरोप लग रहा है. इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड चंद्रमा यादव अभी तक फरार है. जो योगी के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का करीबी है. आरोपियों की धर-पकड़ के बजाय इमानदार पुलिस वाले पर ही गाज गिर रही है.

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