पैसा बोलता हैः चीनी सामान का विरोध, लेकिन VIVO से करार खत्म नहीं करेगा बीसीसीआई

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पैगाम ब्यूरोः लद्दाख में चीनी सैनिकों के हाथों 20 भारतीय जवानों की शहादत से चीन के खिलाफ भारी गुस्सा है. देश भर में चीनी सामानों के बहिष्कार करने की आवाज उठ रही है. जगह-जगह लोग चीनी झंडे और चीनी सामान जला रहे हैं.
चीनी प्रोडक्ट्स का प्रचार कर रहे बॉलीवुड स्टार्स से चीनी कंपनियों के साथ समझौता खत्म करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) आईपीएल के मौजूदा स्पॉन्सर VIVO से करार खत्म करने के लिए तैयार नहीं है.

किसी ने सच ही कहा है कि पैसा बोलता है. बीसीसीआई को भी सिर्फ पैसे की भाषा ही समझ में आती है. इसलिए तो बोर्ड के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल कह रहे हैं है कि आईपीएल में चीनी कंपनी से आ रहे पैसे से भारत को ही फायदा हो रहा है, चीन को नहीं.

बता दें कि बीसीसीआई को VIVO से सालाना 440 करोड़ रुपये मिलते हैं, जिसके साथ पांच साल का करार 2022 में खत्म होगा. धूमल ने कहा कि जज्बाती तौर पर बात करने से तर्क पीछे रह जाता है. हमें समझना होगा कि हम चीन के हित के लिए चीनी कंपनी के सहयोग की बात कर रहे हैं या भारत के हित के लिए चीनी कंपनी से मदद ले रहे हैं.

देशभक्ति की नयी परिभाषा समझाते हुए बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष ने कहा कि जब हम भारत में चीनी कंपनियों को उनके उत्पाद बेचने की अनुमति देते हैं, तो जो भी पैसा वे भारतीय उपभोक्ता से ले रहे हैं, उसमें से कुछ बीसीसीआई को ब्रांड प्रचार के लिए दे रहे हैं और बोर्ड भारत सरकार को 42 फीसदी टैक्स चुका रहा है. इससे भारत का फायदा हो रहा है, चीन का नहीं.

उन्होंने कहा कि हमलोग चीनी प्रोडक्ट्स पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हैं. लेकिन जब तक उन्हें भारत में व्यापार करने की अनुमति है, आईपीएल जैसे भारतीय ब्रांड का उनके द्वारा स्पॉन्सर किये जाने में कोई बुराई नहीं है.

ये भी बता दें कि चीनी कंपनियों के साथ बीसीसीआई का याराना नया नहीं है. पिछले साल सितंबर तक एक और चीनी मोबाइल कंपनी OPPO भारतीय टीम की स्पॉन्सर थी, लेकिन उसके बाद बेंगलुरु की स्टार्ट-अप कंपनी बायजू ने OPPO की जगह ले ली. वैसे बायजू में भी चीन ने भारी पैसा लगाया हुआ है.

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