कोरोना की फर्जी दवा बनाने के आरोप में बुरे फंसे रामदेव, एफआईआर दर्ज

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पैगाम ब्यूरोः किसी ने सच ही कहा है कि लालच बुरी बला है. कोरोना के नाम पर करोड़ों रुपये कमाने के नाम पर इस जानलेवा रोग का शत प्रतिशत इलाज करने वाली दवा बनाने का एलान करने वाले बाबा रामदेव बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं. इस फर्जीवाड़े के लिए उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज हो गया है.

कोरोना से अब तक दुनिया भर में लाखों लोगों की जान जा चुकी है. इस वायरस के संक्रमण का दायर बढ़ता ही जा रहा है. दुनिया भर के वैज्ञानिक इस रोग का दवा बनाने में दिन-रात लगे हुए हैं, लेकिन किसी को अभी तक कामयाबी नहीं मिली है. इस बीच चंद दिन पहले बाबा रामदेव ने ये कह कर तहलका मचा दिया कि उनकी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोना की दवा अविष्कार कर ली है.

सिर्फ यही नहीं बाबा रामदेव ने कोरोनिल नामक इस दवा को बेहद धूमधड़ाके के साथ लांच भी कर दिया. कोरोनिल के बारे में बाबा रामदेव का दावा है कि इससे कोरोना शत प्रतिशत ठीक हो जाता है.

अब कोरोना की फर्जी दवा बनाने के आरोप में जयपुर में बाबा रामदेव और अन्य चार लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें रामदेव के अलावा उनके करीबी आचार्य बालकृष्ण, वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉक्टर बलबीर सिंह तोमर और निदेशक डॉक्टर अनुराग तोमर भी शामिल हैं.

पुलिस में ये एफआईआर बलराम जाखड़ नामक एक वकील ने दर्ज करायी है. जिन्होंने अपनी एफआईआर में कहा है कि फर्जी दवा बनाकर अरबों रुपये कमाने के मकसद से ‘कोरोनिल’ दवा बनाने का दावा किया गया था. इन सभी के खिलाफ धारा 188, 420, 467, 120बी, भादस संगठित धारा 3, 4, राजस्थान एपीडेमिक डिजीज ऑर्डिनेंस 2020, धारा 54, आपदा प्रबंधन अधिनियम आदि आपराधिक धाराओं और ड्रग्स एंड मेजिक रेमेडीज एक्ट 1954 के अधीन कार्रवाई की मांग की गई है.

सिर्फ यही नहीं, चंडीगढ़ की जिला अदालत में भी रामदेव और उनकी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में बाबा रामदेव पर मिलावटी दवा बेचने और हत्या की कोशिश के आरोप लगाये गये हैं. यह मामला चंडीगढ़ के नेशनल कंज्यूमर वेलफेयर काउंसिल के सचिव बिक्रमजीत सिंह ने दर्ज कराया गया है. इस मामले में बाबा रामदेव पर आईपीसी की धारा 275, धारा 276 और 307 के तहत केस दर्ज किया गया है. इस मामले की सुनवाई सोमवार 29 जून को होगी.

बता दें कि आयुष मंत्रालय भी बाबा रामदेव की कोरोना दवा के प्रचार प्रसार पर बैन लगा चुका है. उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग ने भी साफ कहा है कि उन्होंने पतंजलि को कोरोना की नहीं, बल्कि खांसी-बुखार की दवा का लायसेंस दिया था. बाबा रामदेव की दवा का क्लीनिकल ट्रायल करने वाली जयपुर की निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉक्टर बलबीर सिंह तोमर भी अब इस दवा से पल्ला झाड़ रहे हैं.

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