क्या दलित होने के चलते राष्ट्रपति को भूमिपूजन से दूर रखा गया? भागवत किस हैसियत से आमंत्रित

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पैगाम ब्यूरोः अयोध्या में भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर की आधारशिला रख दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी. इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास मौजूद थे. लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती जैसे राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख चेहरे राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में नदारद थे. समारोह में प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री तो शामिल थे, लेकिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आमंत्रित नहीं किया गया, जिस पर सवाल उठने लगे हैं.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबंध दलित समुदाय से है. इसलिए लोग ये आरोप लगा रहे हैं कि दलित होने के चलते उन्हें राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया.

महाराष्ट्र के मंत्री डॉ नितिन राउत ने भी ये सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जी को राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम से क्यों दूर रखा गया है? क्योंकि वो दलित है? संघ प्रमुख मोहन भागवत की भूमि पूजन कार्यक्रम में मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए डॉ नितिन राउत ने कहा कि आखिर आरएसएस चीफ वहां किस हैसियत से है? उन्होंने बीजेपी पर राष्ट्रपति का अपमान करने और सरकार पर मनुवादी सोच दर्शाने का इल्जाम लगाया है.

सोशल मीडिया पर काफी लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जब प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए तो फिर राष्ट्रपति को क्यों नहीं बुलाया गया.

 

15 COMMENTS

  1. मान्यवर,देश में सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समुचित कानून बनाने के लिए अनुच्छेद 340 में व्यवस्था होने के बावजूद आजादी के सात दशक बाद भी पिछड़े वर्ग के समता/समानता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए नियमानुसार कोई कानून सरकार द्वारा नहीं बनाया गया है। मंडल आयोग की संस्तुतियों के आधार पर कार्यकारी आदेश द्वारा 27 प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था 1990 के दशक में की गयी तो सामान्य वर्ग ने इसका घोर विरोध किया, जनमानस को भड़का कर आगजनी, हिंसा आदि करवाकर विभिन्न राज्यों में जान-माल की क्षति पहुंचाई गयी।
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के लिए 10 प्रतिशत के आरक्षण तथा SC/st को पदोन्नतियों में भी आरक्षण के लिए कानून बनाया गया है लेकिन पिछड़ा वर्ग ने इनका कभी कोई विरोध नहीं किया और देश का कानून समझकर उसका सम्मान किया । बावजूद इसके पिछड़े वर्ग के लिए आज तक कोई कानून नहीं बनाया गया है और न ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। परिणाम यह है कि देश का
    पिछड़ा वर्ग आज भी अपने समानता के मूल अधिकारों से वंचित है ।
    पिछड़े वर्ग के समानता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल लोकसभा, विधान सभाओं सहित हर प्रकार की सेवा़ओं में पिछड़े वर्ग के लिए समुचित आरक्षण का विधेयक लाकर कानून बनाया जाय ताकि न्याय हो सके।

  2. तो राष्ट्रपती जी भी खुद कहा राष्ट्रपती जैसे रहते हैं,
    वह बीजेपी आरएसएस के कार्यकर्ता जैसे खुद को समजते है. … नही बुलाया आच्छी बात है बीजेपी ने उनकी औकात दिखा दी,

  3. RSS Desh me vahi Chahte hai ki Hindu muslim ko ladao our Agar Ram mandir ke silahnyas me Rastyapati Dr. Ramnathjikovind ko nahi balahe our Mohan bhagvat ko bulakar Desh ko kya sandesh diya Bharat ki Akhandta our Ekta ko Toda our Bhedbhav ko badhaya hai yehi RSS ki soch hai jo Bhavisya me Aandh bhakto ko nahi dikh raha hai

    • सर जी, भविष्य बड़ा अंधकारमय दिख रहा है. ऊपर वाला हमारे देश की रक्षा करे.

    • बिल्कुल सही कहा आपने. सब एक हैं. सिर्फ पब्लिक के सामने दिखावा करते हैं.

    • ऐसा नहीं कहते, आखिर देश के माननीय राष्ट्रपति हैं.

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