‘मुस्लिम रेजिमेंट’ को लेकर फैलाई जा रही है फर्जी पोस्टः पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

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पैगाम ब्यूरोः सशस्त्र बलों के 120 अवकाशप्राप्त अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर उन सोशल मीडिया पोस्ट और इन्हें प्रसारित करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है जिनके जरिए अफवाह फैलाई जा रही है कि 1965 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई के दौरान भारतीय सेना की मुस्लिम रेजीमेंट ने लड़ाई करने से इनकार कर दिया था. पूर्व अधिकारियों द्वारा बुधवार को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी आह्वान किया गया है कि सरकार उन लोगों की जांच करे, जिन्होंने ‘मुस्लिम रेजिमेंट’ संबंधी पोस्ट जारी किए और उनके खिलाफ निष्पक्ष एवं सख्त कार्रवाई की जाए.

पूर्व नौसेना अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण रामदास, अवकाशप्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल रामदास मोहन, अवकाशप्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल आरके नानावटी, अवकाशप्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल विजय ओबराय और अन्य ने कहा कि मुस्लिम रेजिमेंट संबंधी पोस्ट झूठा है क्योंकि भारतीय सेना में मुस्लिम सेना का कभी कोई अस्तित्व ही नहीं रहा है. 1965 में या उसके पहले या बाद में भारतीय सेना में कभी भी मुस्लिम रेजिमेंट न था और न है.

पत्र में कहा गया है कि मई 2013 से फेसबुक और ट्विटर पर एक फेक अकाउंट से ये फर्जी खबर फैलाई जा रही है. अब भारत-चीन सीमा गतिरोध के बीच इसे फिर से पुनर्जीवित किया गया है. तीन सेना प्रमुखों के अलावा यह पत्र अन्य को भी लिखा गया है.

पूर्व सैनिकों ने अपने पत्र में चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत के मुस्लिम सैनिकों को बदनाम करने वाली एक व्यापक रूप से प्रसारित सोशल मीडिया पोस्ट सशस्त्र बलों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, इसके अलावा इससे देश में सांप्रदायिक घृणा भी फैल सकती है.

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