संजय राउत ने कहाः देश में सिर्फ बंगाल और महाराष्ट्र में ही राज्यपाल हैं, बाकी राज्यों का पता नहीं

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पैगाम ब्यूरोः यूं तो देश के सभी राज्यों में राज्यापल हैं, लेकिन इन दिनों सिर्फ दो राज्यों महाराष्ट्र और बंगाल के राज्यपाल ही सुर्खियों में छाये रहते हैं, जिसका एकमात्र कारण राज्य के मुख्यमंत्री के साथ उनका विवाद है. इस स्थिति पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने जबरदस्त कटाक्ष किया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में इस वक्त दो ही प्रदेशों महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में राज्यपाल हैं. बाकी जगह राज्यपाल हैं या नहीं उन्हें नहीं पता है.

बता दें कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच पहले दिन से ही मतभेद बना हुआ है. कुछ ही दिन पहले राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर राज्य में सभी मंदिरों को खोलने की मांग की थी. इसके साथ ही उन्होंने उद्धव पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि आप अचानक सेक्यूलर कैसे हो गये, जबकि पहले आपको इस शब्द से भी नफरत थी. राज्यपाल के इस बयान पर मुख्यमंत्री ने भी पलटवार किया था. उद्धव ने कहा था कि हिंदुत्व के बारे में मुझे आपके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.

राज्यपाल की इस बयानबाजी पर संजय राउत ने भी सवाल खड़े किये थे. उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता शब्द के अनुसार काम कर रही है, जबकि ऐसा लगता है कि राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं.

संजय राउत ने शुक्रवार को एक बार फिर राज्यपाल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आजकल तो पूरे देश में सिर्फ दो ही राज्यपाल हैं. बाकी कहीं राज्यपाल हैं या नहीं, मुझे पता नहीं. महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल. क्योंकि वहां की जो सरकारें हैं, वो विरोधियों की सरकारें हैं.

महाराष्ट्र की तरह ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच जबरदस्त तनातनी चल रही है. राज्यपाल लगातार बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति पर उंगली उठा रहे हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया है कि जरूरत पड़ने पर वो सारे अधिकार अपने हाथ में ले लेंगे.

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी खामोश नहीं हैं. उन्होंने राज्यपाल को संविधान के दायरे में रह कर काम करने की नसीहत दी है. ममता बनर्जी ने चेतावनी के अंदाज में कहा है कि राज्यपाल शक्तियों की सीमा पार कर मुख्यमंत्री पद की अनदेखी करने और राज्य के अधिकारियों को आदेश देने से दूर रहें.

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