बंगाल चुनाव में बीजेपी का रास्ता साफ करने आ रहे हैं ओवैसी

0
191

पैगाम ब्यूरोः बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेरने और बीजेपी को फिर से सत्ता तक पहुंचने में मदद करने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की अगली मंजिल पश्चिम बंगाल है, जहां अगले साल ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बिहार में अपना टार्गेट पूरा करने के बाद ओवैसी ने अपनी पार्टी एआईएमआईएम को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी उतारने का एलान कर दिया है.

लगभग तमाम राजनीतिक दलों द्वारा ठगे जा चुके मुसलमानों को ओवैसी और उनकी पार्टी में अपना भविष्य नजर आ रहा है. हालांकि वो इस हकीकत को नजरांदाज कर रहे हैं कि ओवैसी की पार्टी अगर 4-5 सीट भी जीत जाती है तो इससे उनका कोई भला होने वाला नहीं है. लेकिन ओवैसी और उनकी पार्टी अपना लक्ष्य जरूर पूरा कर ले रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में 2011 में वाममोर्चा को हराने के बाद से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को ही अल्पसंख्यक वोटों का फायदा मिलता रहा है. एआईएमआईएम के बंगाल में चुनाव लड़ने के फैसले पर पार्टी का कहना है कि ओवैसी का मुसलमानों पर प्रभाव हिंदी और उर्दू भाषी समुदायों तक सीमित है, जो राज्य में मुस्लिम मतदाताओं का सिर्फ छह प्रतिशत है.

पश्चिम बंगाल में 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. कश्मीर के बाद सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता बंगाल में ही हैं. अल्पसंख्यक, विशेषकर मुसलमान, 294 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 100-110 सीटों पर एक निर्णायक कारक हैं, जो 2019 तक, अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ तृणमूल के लिए हमेशा फायदेमंद रहे है. इनमें से अधिकांश ने पार्टी के पक्ष में मतदान किया है, जो भगवा दल के विरोध में हमेशा उनके लिए ‘विश्वसनीय’ रहे हैं.

वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं का कहना है कि एआईएमआईएम के यहां चुनाव लड़ने से समीकरण यकीनन बदल सकता है. मिशन पश्चिम बंगाल के लिए तेलंगाना स्थित पार्टी की विस्तृत योजना के बारे में बात करते हुए, इसके राष्ट्रीय प्रवक्ता असीम वकार ने बताया कि पार्टी ने राज्य में 23 जिलों में से 22 में अपनी इकाईयां स्थापित की हैं.

वकार ने कहा कि हम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. हम रणनीति तैयार कर रहे हैं. हमने राज्य के 23 जिलों में से 22 में अपनी मौजूदगी दर्ज करा ली है. हमें लगता है कि एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर हम राज्य में मजबूत पकड़ बना सकते हैं.

एआईएमआईएम ने पिछले साल नवंबरर में एनआरसी के खिलाफ रैली में ममता बनर्जी पर परोक्ष रूप से निशाना साधने के बाद से ही दोनों पार्टियों के बीच जंग शुरू हो गई थी, जो अब चुनावी मैदान तक पहुंच गई है. जिसका सीधा फायदा बीजेपी को पहुंचेगा. जिसने राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here