60 किसान हो चुके हैं शहीद, फिर भी सरकार कर रही है बातचीत का नाटक

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पैगाम ब्यूरोः किसी क्रिकेटर या फिल्मस्टार को मामूली सी चोट लगने से हमारे प्रधानमंत्री इतने भावुक हो जाते हैं कि फौरन ट्वीट कर उसके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना करने लगते हैं, लेकिन उनके आवास से महज चंद किलोमीटर दूर आंदोलन कर रहे किसानों में से 60 अब तक शहीद हो चुके हैं, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री को किसानों की मौत की कोई फिक्र नहीं है. इसलिए अबतक उन्होंने उनके बारे में एक लफ्ज तक नहीं कहा है. प्रधानमंत्री गुजरात और मध्य प्रदेश जा कर वहां के किसानों से बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हजारों किसानों से बात करने की फुर्सत नहीं है. उनकी सरकार किसानों से बातचीत के नाम पर नाटक कर रही है.

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच हुई शुक्रवार को नौवें दौर की बातचीत हुई, जो पिछले आठ राउंड की तरह बेनतीजा रही. ऑल इंडिया किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष बालकरण सिंह बरार ने कहा कि इस बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकल सका. सरकार अपनी बात पर अड़ी हुई है कि तीनों कानून रद्द नहीं होंगे. अब 19 जनवरी को अगले राउंड की बातचीत होगी.

हकीकत को यह है कि सरकार बातचीत के नाम पर नाटक कर रही है. किसानों को सिर्फ तारीख दी जा रही है. सरकार और किसानों के बीच हो रही बातचीत को देख कर ऐसा लगता है कि कोई बड़ी समस्या का समाधान निकालने के लिए बैठक पर बैठक हो रही है. किसानों की सिर्फ एक ही मांग है कि सरकार कानून को वापस ले. इस पर जवाब देने के बजाय सरकार किसानों को बातचीत के लिए एक नई तारीख थमा दे रही है.

दरअसल सरकार बातचीत के नाम पर किसानों को थका कर उनका मनोबल और आंदोलन दोनों तोड़ना चाहती है. दूसरी तरफ किसान आंदोलन समर्थक ट्रांस्पोर्टरों और अन्य को एनआईए की तरफ से नोटिस भेजा जा रहा है, ताकि वो लोग भयभीत हो कर किसानों का साथ न दें. किसानों ने आज की बैठक में यह मुद्दा भी उठाया और सरकार को चेतावनी दी कि उनके समर्थकों को डराने-धमकाने की कोशिश न की जाये.

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