एंकर रोहित सरदाना भी चढ़ गये कोरोना की बलिः जिंदगी भर झूठ और नफरत फैलाने का किया काम

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पैगाम ब्यूरोः कोरोना महामारी से रोजाना हजारों लोगों की जान जा रही है, लेकिन भारतीय मीडिया कोरोना महामारी की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करने के बजाय एक्जिट पोल की खबरें दिखा रहा है. भारतीय मीडिया का काम सिर्फ सरकार की चालपूसी करना भर रह गया है. उसके लिए आमलोगों की जिंदगी और मौत की कोई अहमियत नहीं रह गई है, लेकिन जब इसी कोरोना वायरस ने टीवी एंकर रोहित सरदाना की जान ले ली, तो पूरी गोदी मीडिया चीखने लगी.

रोहित सरदाना पिछेल कई दिनों से कोरोना संक्रमित थे. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. आज वहीं उन्हें दिल का दौरा पड़ा और मौत हो गई.

सरदाना की मौत पर प्रधानमंत्री मोदी से लेकर उनके मंत्रिमंडल और विपक्ष के तमाम बड़े नेता शोक जता रहे हैं. उनकी मौत को भारतीय पत्रकारिता जगत के लिए बड़ा नुक्सान बताया जा रहा है. हालांकि सच्ची बात तो यह है कि रोहित सरदाना ने पत्रकारिता के नाम पर जिंदगी भर झूठ और नफरत फैलाने का काम ही किया है.

उनकी गिनती भी गोदी मीडिया के नवरत्नों में होती है. जिनका काम मोदी सरकार से सवाल पूछने के बजाय विपक्ष को उंगली दिखाने का है. रोहित सरदाना ने अपनी पूरी पत्रकारिता करियर में सिर्फ सरकार की चापलूसी ही की है. यही उनकी जिंदगी भर की कमाई है.

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