अब कोरोना से बचने वालों का खून चूसेगी सरकारः चुनाव खत्म, फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

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पैगाम ब्यूरोः मोदी सरकार हर दिन यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि अब यह देश गरीबों का नहीं, सिर्फ धन्ना सेठों का रह गया है. कोरोना महामारी के इस दौर में जहां आमलोग अस्पतालों और श्मशानों व कब्रिस्तानों का चक्कर लगा रहे हैं. वहीं अपने पैसे और सरकारी मदद के बिना पर देश के बड़े-बड़े पूंजीपति विदेशों में छुट्टी मना रहे हैं. भारत में जिनलोगों पर कोरोना का आक्रमण नहीं हुआ, उनका खून चूसने की भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के दामों को हथियार बनाया जायेगा.

शनिवार को विमान इंधन के दाम में बड़ी वृद्धि की गई. सरकारी तेल कंपनियों ने विमान ईंधन का भाव प्रति हजार लीटर 3,885 रुपये यानी 6.7 प्रतिशत बढ़ा कर 61,690.28 रुपये कर दिया है.

इसके साथ ही अधिकारियों ने यह इशारा भी दे दिया है कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ाये जायेंगे. लोग पहले से ही इस खतरे का इंतजार कर रहे हैं.

पिछले कई साल से यह देखने में आ रहा है कि जब देश में चुनाव होते हैं तो पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि रोक दी जाती है. चुनाव खत्म होते ही फिर से इंधन के दामों में आग लग जाती है. इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है.

देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे. पेट्रोल की कीमत कई जगहों पर 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90 रुपये के आसपास पहुंच चुकी थी. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम को देख कर लोगों में काफी नाराजगी थी, लेकिन चुनाव शुरू होते ही दाम में इजाफा बंद कर दिया गया. जब तक चुनाव संपन्न नहीं हो गये. तब तक दाम में किसी तरह का उलटफेर नहीं किया गया. अब न सिर्फ चुनाव संपन्न हो चुके हैं, बल्कि 2 मई को वोटों की गिनती भी होने वाली है. ऐसे में सरकार को अब इस बात का कोई डर नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाये जाने से वोटर नाराज होंगे और उसे उसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा. इसलिए सरकार अब आराम से दाम बढ़ायेगी.

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